मूलतः संस्कार का अभिप्राय उन धार्मिक कृत्यों से है जो किसी व्यक्ति को अपने समाज का पूर्ण रुप से योग्य सदस्य बनाने के उद्देश्य से उसके शरीर, मन और मस्तिष्क को पवित्र करने के लिए किए जाते हैं।
संस्कारों का उद्देश्य व्यक्ति में अभीष्ट गुणों को जन्म देना भी है। प्राचीन भारत में संस्कारों का मनुष्य के जीवन में विशेष महत्व है। संस्कारों के द्वारा मनुष्य अपनी सहज प्रवृतियों का पूर्ण विकास करके अपना और समाज दोनों का कल्याण करता है।
आधुनिक शिक्षा पद्धति के आधार पर वैदिक संस्कृत, संस्कृति एवं संस्कारों का उन्मूलन हो रहा है। हम इसी चुनौती का समाधान करने के लिए गुरुकुल परम्परा को पुनर्जीवित कर रहे हैं, ताकि हर बच्चा अपनी जड़ों से जुड़ा रहे और एक सशक्त, संस्कारी भविष्य का निर्माण करे।